थाईलैंड में शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन 23 से 28 मई 2025 तक थाईलैंड के बैंकाक और पटाया शहर में पांच दिवसीय शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसमें छह देशों के शिक्षाविद, कुलपति, प्राचार्य, लेखक, कवि, पत्रकार और हिंदी सेवक भाग लेंगे। कार्यक्रम में कई पुस्तक विमोचन, पांच प्रमुख पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए जाएंगे। ग्लोबल यूनिवर्सिटी यूके द्वारा कुछ हस्तियों को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। थाईलैंड के राजपरिवार और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति इस आयोजन को विशिष्ट बनाएगी। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि एच.आर.एम. किंग जनरल जी.एम. प्रोफेसर दातो' सेरी डॉ. सुमफंड रथापट्टाया डीएससी., जेपी, वाईएमओकेएम रिच महाराजा @ इंडोनेशिया उपस्थित रहेंगे इस आयोजन का उद्देश्य भारत और थाईलैंड के संबंधों को सुदृढ़ करना तथा भाषाओं और संस्कृतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में धरा धाम इंटरनेशनल, यूके गिल्ड फाउंडेशन, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, और देवनागरी उत्थान फाउंडेशन जैसी संस्थाओं का सहयोग प्रमुख रहेगा। के. वि. एन. लक्ष्मी, डॉ. दीप शिखा पाठक, सीमा बनर्जी, गीता दुबे, सरस्वती आचार्य, संतोषी, डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव, संदीप कुमार, संजय यलप्पा चोपड़े, अनघा संजय चोपड़े, सुजाता संजय चोपड़ा, केदार संजय चोपड़ा, आभा शर्मा, प्रतिमा सिंह, रोली जैन, मुख्तार अहमद, डॉ. रक्षा मेहता, शशि रानी, डॉ. माधुरी के. मिश्रा, सुरुचि मिश्रा, प्रीति शर्मा, मुनचुन, सोना कपूर, डॉ. अंजली शर्मा, श्रीमती विनय श्रीवास्तव, सुलभा जोशी, सुमन यादव, प्रमिला पाठक, अक्षत राजेश वर्मा, डॉक्टर चारुमति देसाई, श्री चंद शर्मा, किरण कुमारी, राखी जैन, वंदना महाजन, कल्पना श्रीवास्तव, अर्चना यतिन परब, जी नरसिम्हा मूर्ति, कर्नल जेपी नारायण सिंह, रीना सिंह, अफशा प्रवीन, डॉ. आराधना वर्मा , डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव, डॉ. सौरभ पाण्डेय, डॉ. पूजा निगम, डॉ. सुनील दुबे आदि प्रतिभाएं सम्मानित होंगे भगवान विष्णु की नगरी, बौद्ध धर्म की स्थली , प्राकृतिक सौंदर्य का पिटारा, पार्क मरीन व सफारी वर्ड से युक्त थाइलैंड का पटाया और बैंकाक शहर हिंदू धर्म का थाईलैंड के राज परिवार पर सदियों से गहरा प्रभाव रहा है। माना यह जाता है कि थाईलैंड के राजा भगवान विष्णु के अवतार हैं। इसी भावना का सम्मान करते हुए थाईलैंड का राष्ट्रीय प्रतीक गरुड़ है। थाईलैंड में राजा को राम कहा जाता है। राज परिवार अयोध्या नामक शहर में रहता है। ये स्थान बैंकॉक से कोई 50-60 किलोमीटर दूर होगा। यहां पर बौद्ध मंदिरों की भी भरमार है जिनमें भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में मूर्तियां स्थापित हैं। क्या ये कम हैरानी की बात है कि बौद्ध होने के बावजूद थाईलैंड के लोग अपने राजा को राम का वंशज होने के चलते विष्णु का अवतार मानते हैं। इसलिए थाईलैंड में एक तरह से राम राज्य है। वहां के राजा को भगवान राम का वंशज माना जाता है। थाईलैंड में 94 प्रतिशत आबादी बौद्ध धर्मावलंबी है। फिर भी इधर का राष्ट्रीय चिन्ह गरुड़ है। हिंदू पौराणिक कथाओं में गरुड़ को विष्णु की सवारी माना गया है। गरुड़ के लिए कहा जाता है कि वह आधा पक्षी और आधा पुरुष है। उसका शरीर इंसान की तरह का है, पर चेहरा पक्षी से मिलता है। उसके पंख हैं। अब प्रश्न उठता है कि जिस देश का सरकारी धर्म बौद्ध हो वहां पर हिंदू धर्म का प्रतीक क्यों है? इसका उत्तर ये है कि चूंकि थाईलैंड मूल रूप से हिंदू धर्म था, इसलिए उसे इस में कोई विरोधाभास नजर नहीं आता कि वहां पर हिंदू धर्म का प्रतीक राष्ट्रीय चिन्ह हो। एक सामान्य थाई गर्व से कहता है कि उसके पूर्वज हिंदू थे और उसके लिए हिंदू धर्म भी आदरणीय है। आपको थाईलैंड एक के बाद एक आश्चर्य देता है। वहां का राष्ट्रीय ग्रंथ रामायण है। वैसे थाईलैंड में थेरावाद बौद्ध के मानने वाले बहुमत में हैं, फिर भी वहां का राष्ट्रीय ग्रंथ रामायण है। जिसे थाई भाषा में ‘राम-कियेन ’ कहते हैं, जिसका अर्थ राम-कीर्ति होता है, जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के सबसे बड़े और भव्य हॉल का नाम ‘ रामायण हॉल ’ है। यहां पर राम कियेन पर आधारित नृत्य नाटक और कठपुतलियों का प्रदर्शन प्रतिदिन होता है। नवरात्र पर बैंकॉक के सिलोम रोड पर स्थित श्री नारायण मंदिर थाईलैंड के हिंदुओं का केंद्र बन जाता है। यहां के सभी हिंदू इधर कम से एक बार जरूर आते हैं, पूजा या फिर सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए। इस दौरान भजन, कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान जारी रहते हैं। दिन-रात प्रसाद और भोजन की व्यवस्था रहती है। इस दौरान दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जी की एक दिन सवारी भी मुख्य मार्गो से निकलती है। दक्षिण पूर्व एशिया के इस देश में हिंदू देवी-देवताओं और प्रतीकों को आप चप्पे-चप्पे पर देखते हैं। यूं थाईलैंड बौद्ध देश हैं। पर राम भी अराध्य हैं। राजधानी बैंकॉक से सटा है अयोध्या शहर। मान्यता है कि यही थी भगवान श्रीराम की राजधानी। थाईलैंड के बौद्ध मंदिरों में आपको ब्रह्मा,विष्णु और महेश की मूर्तियां और चित्र मिल जाएंगे। थाईलैंड में तमिल और उत्तर भारत के भारतवंशी हैं। इसलिए मंदिर पर दक्षिण और उत्तर भारत के मंदिरों की तरह से बने हुए हैं। बैंकॉक के प्रमुख रथचेप्रयोंग चौराहे पर ब्रह्मा जी के मंदिर में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां देखने लायक हैं। इनमें हिंदुओं साथ-साथ बौद्ध भी आ रहे हैं। कहीं कोई भेदभाव नहीं है। बैंकॉक बैंकॉक थाइलैंड की राजधानी है। यहां ऐसी अनेक चीजें जो पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध हैं मरीन पार्क और सफारी। मरीन पार्क में प्रशिक्षित डॉल्फिन अपने करतब दिखाती हैं। यह कार्यक्रम बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी खूब लुभाता है। सफारी वर्ल्ड विश्व का सबसे बड़ा खुला चिड़ियाघर (प्राणीउद्यान) है। यहां एशिया और अफ्रीका के लगभग सभी वन्य जीवों को देखा जा सकता है। यहां की यात्रा थकावट भरी लेकिन रोमांचक होती है। रास्ते में खानपान का इंतजाम भी है। पट्टया बैंकॉक के बाद पट्टया थाइलैंड का सबसे प्रमुख पर्यटक स्थल है। यहां भी घूमने-फिरने लायक अनेक खूबसूरत जगह हैं। इसमें सबसे पहले नंबर आता है रिप्लेज बिलीव इट और नॉट संग्रहालय का। यहां का इन्फिनिटी मेज और 4 डी मोशन थिएटर की सैर बहुत ही रोमांचक है। यहां की भूतिया सुरंग लोगों को भूतों का अहसास कराती है फिर भी सैलानी बड़ी संख्या में यहां आते हैं। यहां के कोरल आइलैंड पर पैरासेलिंग और वॉटर स्पोट्स का आनंद उठाया जा सकता है। यहां पर काँच के तले वाली नाव भी उपलब्ध होती हैं जिससे जलीय जीवों और कोरल को देखा जा सकता है। कोरल आइलैंड में एक रत्न दीर्घा भी है जहां बहुमूल्य से रत्नों के बार में जानकारी ली जा सकती है। लेकिन इस आइलैंड में आने से पहले यह जान लें कि यहां का एक ड्रेस कोड है जिसका पालन करना आवश्यक है। कोई पर्यटक पट्टया आए और अलकाजर कैबरट न जाए ऐसा नहीं हो सकता। यहां पर नृत्य, संगीत व अन्य कार्यक्रमों का आनंद उठाया जा सकता है। यहां होने वाले कार्यक्रमों की खास बात यह है कि इसमें काम करने वाली खूबसूरत अभिनेत्रियां वास्तव में पुरुष होते हैं।
थाईलैंड में शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन 23-28 मई 2025, बैंकाक-पटाया में अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक, सांस्कृतिक, भाषाई कार्यक्रम, छह देशों के शिक्षाविद, कुलपति, लेखक, कवि, पत्रकार शामिल।